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प्रेमचन्द के उपन्यासन पर भोजपुरी फिल्म बने के चाही -राकेश
पाण्डेय प्रस्तुति- मनोज भावुक
सुपर डुपर हिट फिल्म ‘बलम परदेशिया ‘ से आपन
सशक्त पहचान बनावे वाला अभिनेता राकेश पाण्डेय आजुवो कवनो न कवनो रूप में फिल्म
जगत में सक्रिय बानी।सन 2002 में जुहू तारा रोड़ पर अवस्थित उहाँ के निवास स्थान
‘बंसत बहार’ में बइठ के उहाँ के फिल्मी सफर का संदर्भ में एगो लंबा गपशप भइल रहे।पेश
बा उहाँ से बात-चीत के मुख्य अंश - भावुक - रउवा अपना अब तक के फिल्मी सफर के
बारे में बताईं। राकेश पाण्डे- सन ई. 1966 में फिल्म एण्ड टेलीविजन इंस्टीच्यूट
आफ इण्डिया, पूणे से एक्टिंग में डिप्लोमा कइला के बाद हम मुम्बई आ गइनी आ इप्टा
में सक्रिय हो गइनी। राजेन्द्र यादव के उपन्यास 'सारा आकाश' पर आधारित कलात्मक
फिल्म (निर्देशक- बासु चटर्जी ) हमार पहिला फिल्म रहे। ओकरा बाद कई गो कलात्मक
आ कमर्शियल फिल्म में नायक-खलनायक के रूप में काम कइलीं- 'कभी धूप कभी छांव,
आंसू बन गये फूल, आन्दोलन मृग-तृष्णा, एक गांव की कहानी, मुट्ठी भर चावल,शंतरज
के मोहरे, इंतजार, वो मैं नही, हिमालय से ऊँचा, मंजिल, सेवक, मैला आंचल, मान
जाइये, दिल की राहें, अनोखा दान, मेरा रक्षक, रखवाला, दिल चाहता हैं,
बैगरह-बैगरह बाकिर हमार पहचान त बनल भोजपुरी फिल्म से। भावुक- भोजपुरी फिल्म
में राउर प्रवेश कइसे भइल? राकेश पाण्डे- सन ई. 1975 में नाजीर हुसैन साहब से
हमार मुलाकत भइल। हिन्दी सिनेमा में उहाँ का हमार काम देखलहीं रहनी। भोजपुरी
खातिर प्रस्ताव रखनी। हमरा सामने भाषा के समस्या रहे। हमार जनम हिमाचल प्रदेश
में भइल बा। भोजपुरी ना आवत रहे। बाकिर नाजीर हुसैन साहेब के जिद्द के आगे हमरा
घुटना टेके के पड़ल। तब त हम सपनों में ना सोचले रहनी कि नाजीर साहेब हमरा खातिर
अइसन फिल्म लेके आइल बानी, जवना से हम हमेशा-हमेशा खातिर भोजपुरी के होके रह
जाइब। 1977 में बलम परदेशिया बनल आ ओकर सफलता हमरा के भोजपुरी फिल्म जगत में
स्थापित क देलस। तब से आज ले लगभग पचास गो भोजपुरी फिल्म में बतौर नायक अभिनय
कइलीं। 'बलम परदेशिया' के बाद 'रूस गइले सइया हमार' , भइया दूज , आ धरती मइया
के हम आपन सबसे अधिक सफल फिल्म मानिलें। भोजपुरी के पहिला धारावाहिक 'सांची
पिरितिया' जवन कि लखनऊ आ पटना से प्रसारित भइल, में हम काम कइलीं आ आजुवो
सक्रिय बानी। ई टी.वी पर कई गो भोजपुरी प्रोजेक्ट बा। ओकरा फेर में लागल बानी।
--------------------------------------------------------------------- राकेश
पाण्डे अभिनित कुछ प्रमुख भोजपुरी फिल्म - बलम परदेसिया, गंगा कहे पुकार के,
रूस गइलें सइयां हमार, चनवा के ताके चकोर, बैरी कंगना, बिरहिन जनम-जनम के, धरती
मइया, सात फेरे, भइया दूज, गंगा हमार माई, सइयां तोरे कारन, घर गृहस्थी, बिटिया
भइल सयान, संपूर्ण तीर्थयात्रा, गंगा सूरज, बहुरिया, सोनवा के पिंजरा,
धनिया-मुनिया, सैंया मगन पहलवानी में, रखिह राखी के लाज, टूटे ना पिरितिया के
डोर, भैया भउजी के दुलार, हक के लड़ाई, सेनुर, घर-मंदिर, बटोहिया, बंसुरिया बाजे
गंगा तीर, गजब भइल रामा, गंगा जइसन भउजी हमार, पलना में झूले ललना, हे तुलसी
मइया, रखिह लाज अंचरवा के, बलमा नादान, तुलसी सोहें हमार अंगना, आदि।
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भावुक - अच्छा
बात बा जे अपने फेर में लागल बानी। बहुत लोग के मुंह से सुनत बानी। कान पाक गइल
बा। सभे फेर में लागल बा, बावजूद एकरा अब ऊ लहर नइखे, जवन शुरूआती दौर में रहे,
का वजह बा? राकेश पाण्डे - कई गो वजह बा, पहिला बा स्क्रिप्ट के कमजोरी। अश्लील
आ अलूल-जलूल स्क्रिप्ट से भोजपुरी फिल्म के पतन भइल बा। जेकरा फिल्म के
ए.बी.सी.डी. नइखे मालूम, उहो स्क्रिप्ट राइटर बनि जाता। कुछ लोग त निर्माता,
निर्देशक, पटकथा लेखक , हीरो अपने सब बाड़न। एह मानसिकता में कइसन फिल्म बनीं।
भावुक- (बात काटत)
पाण्डे जी, अपने स्क्रिप्ट के बात करत बानी, भोजपुरी फिल्म खातिर कइसन
स्क्रिप्ट चाहीं? राकेश पाण्डे- (तपाक से) प्रेमचन्द के उपान्यास जइसन।
प्रेमचन्द के उपन्यास पर भोजपुरी फिल्म बनो। ढंग से बनो। ईमानदारी से बनो ना त
हमार विश्वास बा कि फिल्म जरूर सफल होई। भावुक- पाण्डे जी माफ करीं हम रउरा से
सहमत बानी बाकिर भोजपुरी साहित्य में भी अइसन बहुत उपन्यास लिखाइल बा भा भोजपुरी
में बहुत अइसन लोककथा बा, जवना पर फिल्म बनावल जाय त हमार विश्वास बा कि एक बेर
फेर भोजपुरी के लोहा सभे माने लागी। अइसे अपने के बात करत रहनी ह प्रेमचन्द जी
के उपन्यास के त उहाँ के उपन्यास पर ढंग से फिल्म बनावे खातिर कवनो बड़ निर्माता
के पहल करें के पड़ी। अइसन निर्माता भोजपुरी में कय गो बाड़न? आ जे बा ऊ खुदे
स्क्रिप्ट राइटर बा, ऊ अपना के प्रेमचन्द से कम थोड़े बुझेला। राकेश पाण्डे- (हंसत)
बात त सही बा बाकिर एकर कारणों बा। भोजपुरी में बहुत अधिक बजट के फिल्म नइखे
बनावल जा सकत। कारन कि भोजपुरी के क्षेत्र सीमित बा, एह से बड़ा बजट के पूर्ति
कइल कठिन बा। सरकारी मदद त बा ना। जवन करे के बा, अपने करे के बा। एह से
निर्माता बजट कम करे खातिर खुदे निर्देशक आ स्क्रिप्ट राइटर बनि जात बाड़न।
भावुक- बाकिर एह से फिल्म के गुणवता पर त प्रभाव पड़त बा? राकेश पाण्डे- बिल्कुल
पड़त बा। एही से सरकारण के सहयोग जरूरी बा, जवन कि दोसरा भाषा के फिल्मनि के मिलि
रहल बा। भावुक- सुननी हं कि अपने भी निर्देशन में हाथ साफ करे लागल बानी? राकेश
पाण्डे- सी ग्रेड के निर्देशक के अन्डर में काम कइल मुश्किल बा।तीन दशक हो गइल
, फिल्म लाइन में काम करत हमरा।आंख के सामने कुछऊ उल्टा-सीधा होत रहो आ हम
बर्दाश्त करत रहीं, संभव नइखे। एह से अपना मन -मिजाज के फिल्म बनावे खातिर हम
खुदे निर्देशन करे के बात सोचनी आ ' बसुरिया बाजे गंगा तीर' आ 'तुलसी सोहे हमरा
अंगना' के निर्देशन कइलीं- भावुक- आगे का विचार बा? राकेश पाण्डे- एगो अइसन
फिल्म बनावे के सोच रहल बानी, जवना से भोजपुरी फिल्म बनावे के लहर शुरू हो जाव।
भावुक- बहुत अच्छा बा। अद् भुत। हमार शुभकामना बा। हार्दिक इच्छा बा। भगवान करस
ऊ शुभ दिन जल्दी आवे। अपने हमरा साथे अतना नीमन बात-चीत कइनी। बहुत-बहुत
धन्यवाद। |